राजमार्गों, रेलवे एवं औद्योगिक गलियारों हेतु शासन द्वारा भूमि अधिग्रहण की स्थिति में भूस्वामियों को RFCTLARR अधिनियम 2013 के अंतर्गत उचित प्रतिकर पाने का पूर्ण विधिक अधिकार है।
प्रमुख विधिक निष्कर्ष
हरिद्वार, रुड़की एवं सम्पूर्ण उत्तराखंड में अधिग्रहीत भूमि पर भूस्वामी वर्तमान सर्किल/बाजार दर, ग्रामीण/शहरी गुणक, 100% सोलेशियम, धारा 30 के अंतर्गत 12% प्रतिवर्ष अतिरिक्त ब्याज एवं धारा 64 के तहत प्राधिकरण रेफरेंस के माध्यम से बढ़ा हुआ प्रतिकर पाने के हकदार हैं।
1. उचित प्रतिकर की वैधानिक गणना (प्रथम अनुसूची)
सक्षम प्राधिकारी धारा 26 के तहत बाजार मूल्य तय करता है, उस पर ग्रामीण/शहरी गुणक लगाता है, भूमि से जुड़ी संपत्तियों (पेड़, नलकूप, निर्माण) का मूल्यांकन जोड़ता है, अनिवार्य 100% सोलेशियम जोड़ता है तथा 12% वार्षिक अतिरिक्त राशि प्रदान करता है।
2. अपर्याप्त अवार्ड एवं सर्किल रेट विवादों को चुनौती
यदि विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (SLAO) हाल ही में पंजीकृत उच्च मूल्य वाले सेल डीड्स की उपेक्षा कर कम मुआवजा तय करता है, तो भूस्वामियों को औपचारिक आपत्ति दर्ज कर प्रतिकर केवल 'विरोध सहित' (Under Protest) स्वीकार करना चाहिए।
3. भूमि अधिग्रहण प्राधिकरण को रेफरेंस (धारा 64)
भूस्वामी अवार्ड घोषित होने के 6 सप्ताह या 6 माह के भीतर कलेक्टर के समक्ष प्रार्थना पत्र देकर मामले को भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वासन प्राधिकरण (LARRA) को रेफर कराकर प्रतिकर में पर्याप्त वृद्धि की मांग कर सकते हैं।
4. उत्तराखंड उच्च न्यायालय में रिट याचिका उपचार
यदि अधिग्रहण में सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन (SIA) की अनदेखी हो, धारा 21 के नोटिस न दिए गए हों, या वैधानिक समय सीमा के उल्लंघन से अधिग्रहण व्यपगत (Lapse) हो गया हो, तो उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल में अनुच्छेद 226 के तहत सीधे चुनौती दी जा सकती है।
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
विधिक मार्गदर्शन नोट | RCS & Associates (रुड़की व हरिद्वार में अनुभवी वकील एवं अधिवक्ता)
संस्थापक: रमेश चन्द सैनी (पूर्व वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी, उ.प्र. | M.A., MBA, LL.M.) | सदस्य: अमरदीप सैनी (नोटरी एवं अधिवक्ता)
यह विधिक आलेख सामान्य सूचना एवं शैक्षणिक संदर्भ हेतु प्रकाशित किया गया है। यदि आपको उत्तराखंड उच्च न्यायालय (नैनीताल), सर्वोच्च न्यायालय अथवा जिला एवं सत्र न्यायालय हरिद्वार (रोशनाबाद) / रुड़की में रिट याचिका, स्टे आर्डर (Stay Order), अग्रिम जमानत (धारा 482 BNSS / 438 Cr.P.C.), नियमित जमानत, चेक बाउंस अथवा दीवानी विवाद में विधिक परामर्श आवश्यक है, तो कृपया संपर्क करें।