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भू-राजस्व विधिशास्त्र

राजस्व एवं भूमि अभिलेख विधि

भू-राजस्व वाद, दाखिल-खारिज विवाद, खतौनी दुरस्ती, कृषि भूमि विभाजन एवं हदबंदी पैमाइश।

अभ्यास क्षेत्र विवरण

कृषि भूमि अभिलेख, दाखिल-खारिज (Mutation), खतौनी दुरस्ती एवं कृषि जोत विभाजन के मामलों में भू-राजस्व कानूनों का विशेष ज्ञान आवश्यक है। RCS & Associates तहसीलदार, उप-जिलाधिकारी (SDO/SDM), अपर जिलाधिकारी (ADM), कमिश्नर कोर्ट एवं राजस्व परिषद उत्तराखंड (देहरादून) में कृषकों एवं भूमि स्वामियों का प्रभावी प्रतिनिधित्व करता है।

प्रमुख विधिक सेवाएं एवं कार्यक्षेत्र

विवादित दाखिल-खारिज (Mutation)

पंजीकृत बैनामा, वरासत या वसीयत के आधार पर तहसीलदार न्यायालय में दाखिल-खारिज कराना अथवा अवैध प्रविष्टि पर आपत्ति दाखिल करना।

खतौनी एवं खसरा दुरस्ती (धारा 33/39)

राजस्व अभिलेखों में लिपिकीय, फर्जी या गलत प्रविष्टियों को दुरुस्त कराने की विधिक कार्यवाही।

कृषि भूमि विभाजन वाद (Partition धारा 116)

संयुक्त कृषि खाते का विधिक विभाजन, अंश निर्धारण एवं अलग-अलग कुरा (Kurra) बनवाना।

सीमांकन एवं पैमाइश (हदबंदी)

राजस्व निरीक्षक (कानूनगो/लेखपाल) द्वारा भूमि की आधिकारिक पैमाइश एवं पत्थर नसब कराना।

राजस्व अपीलें एवं पुनरीक्षण

तहसीलदार व एसडीएम के आदेशों के विरुद्ध जिलाधिकारी, कमिश्नर कोर्ट एवं राजस्व परिषद उत्तराखंड (देहरादून) में अपीलें।

प्रासंगिक विधियां एवं वैधानिक प्रावधान

  • उत्तराखंड ज़मींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम (ZALR)
  • उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड भू-राजस्व अधिनियम एवं राज्य राजस्व संहिता (धारा 33/39, धारा 116)
  • उत्तराखंड काश्तकारी एवं भूमि सीलिंग विनियम
  • सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (राजस्व में लागू प्रावधान)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

नहीं। दाखिल-खारिज केवल भू-राजस्व वसूली हेतु एक प्रशासनिक प्रविष्टि है; मालिकाना हक पंजीकृत विलेख एवं दीवानी अदालत के निर्णय से तय होता है।

प्रभावित पक्ष तहसीलदार के समक्ष लिखित आपत्ति दर्ज करा सकता है अथवा निर्धारित समय सीमा में उप-जिलाधिकारी (SDM) के समक्ष अपील दायर कर सकता है।

सह-खातेदारों को एसडीएम न्यायालय में धारा 116 के तहत विभाजन वाद दायर करना होता है, जिसमें प्रारंभिक डिक्री, कुरा निर्माण एवं अंतिम डिक्री पारित होती है।

विधिक परामर्श एवं प्रकरण समीक्षा

अपने विधिक मामले, उच्च न्यायालय रिट, जमानत अथवा दीवानी विवाद के संदर्भ में हमारे वरिष्ठ अधिवक्ताओं से विधिक परामर्श हेतु संपर्क करें।

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संस्थापक: अधिवक्ता रमेश चन्द सैनी (पूर्व वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी, उ.प्र.) | सदस्य: अधिवक्ता अमरदीप सैनी (नोटरी एवं अधिवक्ता)।

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