चेक अनादरण (धारा 138 NI Act)
सांविधिक मांग नोटिस, आपराधिक परिवाद, अंतरिम मुआवजा (Sec 143A) एवं रणनीतिक विचारण प्रतिरक्षा।
अभ्यास क्षेत्र विवरण
परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत कार्यवाहियों में निश्चित समय सीमाओं एवं वैधानिक औपचारिकताओं का कड़ाई से पालन आवश्यक है। हमारे चैम्बर्स 15-दिवसीय चेक बाउंस नोटिस भेजने, न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत करने, धारा 143A के अंतर्गत 20% अंतरिम मुआवजा दिलाने, धारा 139 की विधिक उपधारणाओं का खंडन करने एवं धारा 147 के तहत समझौते में व्यापक विधिक सेवाएं प्रदान करते हैं।
प्रमुख विधिक सेवाएं एवं कार्यक्षेत्र
सांविधिक मांग नोटिस (15-Day Notice)
बैंक मीमो प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर तथ्यपरक 15-दिवसीय वैधानिक मांग नोटिस जारी करना एवं डाक रसीद प्रमाण सुरक्षित रखना।
आपराधिक परिवाद प्रस्तुतीकरण
नोटिस अवधि समाप्त होने के 30 दिनों के भीतर न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में परिवाद दाखिल करना।
अंतरिम मुआवजा प्रार्थना पत्र (Sec 143A)
विचारण लंबित रहने के दौरान 20% तक अंतरिम मुआवजा दिलाए जाने हेतु न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत करना।
आरोपी प्रतिरक्षा रणनीति
धारा 139 की कानूनी उपधारणा का खंडन कर यह सिद्ध करना कि कोई वैध ऋण नहीं था या सुरक्षा चेक का दुरुपयोग हुआ।
शमन एवं समझौता (Compounding Sec 147)
धारा 147 NI Act के तहत दोनों पक्षों के बीच विधिवत समझौता कराकर वाद समाप्त कराना।
प्रासंगिक विधियां एवं वैधानिक प्रावधान
- परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (धारा 138, 139, 141, 142, 143A, 148)
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 / दंड प्रक्रिया संहिता, 1973
- भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 / भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872
- बैंककार बही साक्ष्य अधिनियम एवं RBI चेक समाशोधन दिशानिर्देश
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
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संस्थापक: अधिवक्ता रमेश चन्द सैनी (पूर्व वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी, उ.प्र.) | सदस्य: अधिवक्ता अमरदीप सैनी (नोटरी एवं अधिवक्ता)।
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