उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल एवं विचारण न्यायालयों में समर्पित वकालत
उत्तर प्रदेश अभियोजन विभाग में एक प्रतिष्ठित कार्यकाल के उपरांत 06 मार्च 1998 को अधिवक्ता रमेश चन्द सैनी (पूर्व वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी, उ.प्र.) द्वारा स्थापित, RCS & Associates रुड़की एवं हरिद्वार (उत्तराखंड) स्थित अनुभवी अधिवक्ताओं एवं विधिक सलाहकारों (Advocates & Lawyers) का प्रमुख विधिक चैम्बर्स है, जिसकी मुख्य वकालत उत्तराखंड उच्च न्यायालय, नैनीताल एवं भारत के सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष केंद्रित है।
हमारे चैम्बर्स भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 और 227 के अंतर्गत संवैधानिक रिट याचिकाओं, प्रशासनिक फैसलों, सरकारी निविदा विवादों, नगरपालिका नियमों एवं सांविधिक उल्लंघनों को चुनौती देने में विशेष दक्षता रखते हैं। आपराधिक विधिशास्त्र में हमारे वकील आपराधिक अपीलों, पुनरीक्षणों, अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail under Section 482 BNSS / Section 438 Cr.P.C.), नियमित जमानत तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 / धारा 482 Cr.P.C. के तहत FIR निरस्तीकरण याचिकाओं का संचालन करते हैं।
पूर्व वरिष्ठ अभियोजन सेवा से प्राप्त गहन विचारण एवं प्रक्रियात्मक अनुभव के साथ, हमारा विधिक अभ्यास जिला एवं सत्र न्यायालय हरिद्वार (रोशनाबाद) तथा सिविल जज व मजिस्ट्रेट न्यायालय रुड़की के समक्ष दीवानी मुकदमों, आदेश 39 CPC स्टे आर्डर (Stay Order), संपत्ति स्वत्व वाद, धारा 138 एनआई एक्ट एवं आपराधिक विचारण में अनुशासित अदालती पैरवी, संपूर्ण साक्ष्य परीक्षण और रणनीतिक कानूनी सलाह प्रदान करता है।
मुख्य विधिक अभ्यास आयाम
उच्च न्यायालय रिट एवं अपील
नैनीताल में अनुच्छेद 226/227 रिट याचिकाएं, दीवानी व आपराधिक अपीलें, पुनरीक्षण एवं स्थगन आदेश।
आपराधिक प्रतिरक्षा एवं जमानत
अग्रिम जमानत, नियमित जमानत, सत्र विचारण प्रतिरक्षा एवं धारा 528 BNSS / धारा 482 CrPC FIR निरस्तीकरण।
कॉर्पोरेट एवं वाणिज्यिक
व्यावसायिक अनुबंध, कंपनी विवाद समाधान एवं धारा 138 एनआई एक्ट चेक बाउंस मुकदमे।
दीवानी एवं पारिवारिक
व्यादेश (Injunction), स्टे आर्डर (Stay Order), विनिर्दिष्ट पालन, संपत्ति बंटवारा एवं पारिवारिक मुकदमे।
Ramesh Chand Saini, Advocate
Ex-Senior Prosecuting Officer, UP | M.A., MBA, LL.M.
अधिवक्ता एवं विधिक सलाहकार
अनुभवी विधिक पेशेवर जो गहन सांविधिक विश्लेषण, रणनीतिक अदालती पैरवी, स्टे आर्डर (Stay Order) एवं सटीक विधिक प्रलेखन प्रदान करते हैं।
Ramesh Chand Saini, Advocate
पूर्व वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी, अभियोजन विभाग (उत्तर प्रदेश)
शैक्षणिक योग्यता: M.A. (English), MBA, LL.M.
अधिवक्ता रमेश चन्द सैनी RCS & Associates के संस्थापक एवं मुख्य अधिवक्ता हैं। उत्तर प्रदेश अभियोजन विभाग में पूर्व वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी के रूप में विशिष्ट सेवा देने के उपरांत, वे अपने व्यापक आपराधिक विचारण अनुभव, गहन अभियोजन कौशल और साक्ष्य प्रक्रियाओं की असाधारण समझ को निजी वकालत में समर्पित कर रहे हैं। वे उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल एवं रुड़की-हरिद्वार विचारण न्यायालयों में आपराधिक प्रतिरक्षा, अग्रिम व नियमित जमानत, रिट एवं अपीलीय मामलों का कुशल संचालन करते हैं।
विस्तृत ज्ञान एवं अभ्यास क्षेत्र:
- संवैधानिक एवं रिट याचिकाएं: उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल के समक्ष अनुच्छेद 226/227 याचिकाएं।
- आपराधिक प्रतिरक्षा एवं जमानत: नियमित जमानत, अग्रिम जमानत (Section 482 BNSS / Section 438 Cr.P.C.), जिरह (Cross-Examination) एवं FIR निरस्तीकरण।
- वाणिज्यिक एवं कॉर्पोरेट विधि: व्यावसायिक अनुबंध, साझेदारी विलेख एवं वाणिज्यिक विवाद।
- पारिवारिक एवं वैवाहिक विधि: वैवाहिक विवाद, BNSS भरण-पोषण, कस्टडी एवं पारिवारिक समझौते।
- दीवानी वाद एवं स्टे आर्डर: आदेश 39 CPC व्यादेश, स्टे आर्डर (Stay Order), विनिर्दिष्ट पालन एवं संपत्ति स्वत्व वाद।
Amardeep Saini, Notary & Advocate
नोटरी पब्लिक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता | 25+ वर्षों का न्यायिक अनुभव
LL.M. (मास्टर ऑफ लॉज़) | कार्यकारी, राजस्व एवं विचारण न्यायालय
25 से अधिक वर्षों के सक्रिय विधिक अनुभव के साथ, अधिवक्ता अमरदीप सैनी (LL.M.) संपत्ति एवं राजस्व मामलों (Property & Revenue Matters) में अनुभवी पैरवी प्रदान करते हैं। वे कार्यकारी न्यायालयों (SDM, तहसीलदार, कलेक्टर), कमिश्नर कोर्ट, एवं राजस्व परिषद (Board of Revenue) देहरादून के साथ-साथ दीवानी मुकदमों, आदेश 39 CPC स्टे आर्डर (Stay Order), धारा 138 एनआई एक्ट और सांविधिक नोटरी प्रमाणीकरण में विशेषज्ञता रखते हैं।
प्रमुख अभ्यास क्षेत्र एवं विशेषज्ञता:
- संपत्ति एवं राजस्व मामले: कार्यकारी न्यायालय (SDM, तहसीलदार, कलेक्टर), कमिश्नर कोर्ट एवं राजस्व परिषद देहरादून।
- नोटरी सत्यापन एवं प्रमाणीकरण: नोटरी अधिनियम के अंतर्गत आधिकारिक सांविधिक सत्यापन, शपथ पत्र एवं दस्तावेज।
- विधिक प्रलेखन एवं 30-वर्षीय स्वत्व जांच: विलेख प्रारूपण, संपत्ति टाइटल ड्यू डिलिजेंस, अनुबंध एवं नोटिस।
- दीवानी वाद एवं स्टे आर्डर: रुड़की व हरिद्वार न्यायालयों में संपत्ति वाद, बंटवारा एवं आदेश 39 CPC व्यादेश व स्टे आर्डर (Stay Order)।
- धारा 138 NI एक्ट एवं वैवाहिक विषय: चेक अनादर मुकदमेबाजी, सहमति से तलाक एवं पारिवारिक समझौते।
संरचित पेशेवर कार्यप्रणाली
हमारा चैम्बर्स संपूर्ण तैयारी, यथार्थवादी जोखिम मूल्यांकन और तत्पर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने हेतु विधिक विश्लेषण के अनुशासित क्रम का पालन करता है।
तथ्यों का गहन श्रवण
घटनाक्रम की समयरेखा स्थापित करने, ग्राहक के पक्ष को समझने और अंतर्निहित संदर्भ एकत्र करने हेतु विस्तृत परामर्श।
दस्तावेज़ी परीक्षण
ग्राह्यता और साक्ष्य शक्ति का परीक्षण करने हेतु विक्रय विलेखों, अनुबंधों, नोटिसों, राजस्व अभिलेखों और अदालती आदेशों की सूक्ष्म जांच।
सांविधिक विश्लेषण
व्यावहारिक कानूनी उपचार निर्धारित करने हेतु लागू कानूनों, प्रासंगिक न्यायिक निर्णयों, क्षेत्राधिकार और परिसीमा अवधि का मूल्यांकन।
कुशल विधिक निष्पादन
सटीक वाद पत्रों का प्रारूपण, लिखित दलीलें तैयार करना और सक्षम न्यायिक मंचों के समक्ष प्रभावी पैरवी।
मूल विधिक मूल्य
वे सिद्धांत जो हमारे पेशेवर आचरण, मुवक्किलों के साथ व्यवहार और अदालती उत्तरदायित्वों का मार्गदर्शन करते हैं।
सत्यनिष्ठा एवं पारदर्शिता
बिना किसी झूठे आश्वासन के कानूनी योग्यता, प्रक्रियात्मक बाधाओं और संभावित जोखिमों का स्पष्ट मूल्यांकन।
पेशेवर गोपनीयता
मुवक्किल के सभी अभिलेखों, व्यावसायिक जानकारियों और संवेदनशील पारिवारिक या व्यक्तिगत विवरणों पर पूर्ण गोपनीयता।
गहन पूर्व तैयारी
अदालत में बहस प्रस्तुत करने या वार्ता में प्रवेश करने से पूर्व गहन कानूनी शोध और दस्तावेज़ी व्यवस्थितिकरण।
स्पष्ट कानूनी संवाद
जटिल सांविधिक प्रावधानों और प्रक्रियात्मक चरणों को सरल, सुगम भाषा में समझाना ताकि मुवक्किल हमेशा अवगत रहे।
न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान
अदालती समय-सीमा, सांविधिक प्रक्रियाओं और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नैतिक मानकों का कड़ाई से पालन।
मुवक्किल-हितैषी पैरवी
मुवक्किल के वैध कानूनी हितों को प्राथमिकता देते हुए उनके विधिक पक्ष को स्पष्टता और दृढ़ता के साथ प्रस्तुत करना।
रुड़की व हरिद्वार में अपने मामले पर हमारे चैम्बर्स से परामर्श करें
हमारे रुड़की कार्यालय में व्यक्तिगत परामर्श का समय निर्धारित करें अथवा प्रारंभिक दस्तावेज़ मूल्यांकन का अनुरोध करें।