आपराधिक प्रतिरक्षा एवं जमानत विधिशास्त्र
अग्रिम जमानत, नियमित जमानत, सत्र विचारण, साक्ष्य जिरह एवं उच्च न्यायालय में FIR निरस्तीकरण।
अभ्यास क्षेत्र विवरण
उत्तर प्रदेश अभियोजन विभाग में पूर्व वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी के रूप में दीर्घकालिक सेवाएं देने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश चन्द सैनी एवं अधिवक्ता अमरदीप सैनी के कुशल नेतृत्व में, हमारे चैम्बर्स आपराधिक मुकदमों के सभी चरणों में उत्कृष्ट प्रतिरक्षा प्रदान करते हैं। इसमें गिरफ्तारी पूर्व अग्रिम जमानत, नियमित जमानत, सत्र विचारण में अभियोजन साक्षियों से तीखी जिरह, तथा धारा 528 BNSS / धारा 482 Cr.P.C. के तहत उत्तराखंड उच्च न्यायालय में FIR निरस्तीकरण शामिल है। हमारा अभियोजन अनुभव पुलिस विवेचना की कमियों और तकनीकी दोषों को उजागर करने में मुवक्किल को निर्णायक विधिक लाभ प्रदान करता है।
प्रमुख विधिक सेवाएं एवं कार्यक्षेत्र
अग्रिम जमानत याचिकाएं (Anticipatory Bail)
सत्र न्यायालय हरिद्वार (रोशनाबाद) एवं उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल में धारा 482 BNSS / 438 Cr.P.C. के तहत गिरफ्तारी पूर्व संरक्षण।
नियमित एवं वैधानिक डिफॉल्ट जमानत
धारा 480/483 BNSS / 437/439 Cr.P.C. के तहत नियमित जमानत तथा 60/90 दिन में चार्जशीट दाखिल न होने पर धारा 187 BNSS / 167(2) Cr.P.C. डिफॉल्ट जमानत।
FIR निरस्तीकरण याचिकाएं (FIR Quashing)
तथ्यहीन, दुर्भावनापूर्ण, वैवाहिक अथवा समझौते पर आधारित मुकदमों में धारा 528 BNSS / 482 Cr.P.C. के तहत उत्तराखंड उच्च न्यायालय से कार्यवाही निरस्त कराना।
सत्र विचारण एवं साक्ष्य जिरह (Cross-Examination)
आरोप विरचन, मेडिकल व फॉरेंसिक साक्ष्यों की तकनीकी जांच, एवं अभियोजन साक्षियों से विस्तृत व निर्णायक जिरह।
आपराधिक अपीलें एवं पुनरीक्षण (Appeals & Revisions)
दोषसिद्धि आदेशों, कारावास दंडादेशों एवं विचारण न्यायालय के त्रुटिपूर्ण आदेशों के विरुद्ध सत्र न्यायालय व उच्च न्यायालय में अपीलें।
प्रासंगिक विधियां एवं वैधानिक प्रावधान
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) एवं दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (Cr.P.C.)
- भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) एवं भारतीय दंड संहिता, 1860 (IPC)
- भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (BSA) एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, एनडीपीएस (NDPS) अधिनियम, पॉक्सो (POCSO) एवं विशेष आपराधिक कानून
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
विधिक परामर्श एवं प्रकरण समीक्षा
अपने विधिक मामले, उच्च न्यायालय रिट, जमानत अथवा दीवानी विवाद के संदर्भ में हमारे वरिष्ठ अधिवक्ताओं से विधिक परामर्श हेतु संपर्क करें।
RCS & Associates चैम्बर्स
संस्थापक: अधिवक्ता रमेश चन्द सैनी (पूर्व वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी, उ.प्र.) | सदस्य: अधिवक्ता अमरदीप सैनी (नोटरी एवं अधिवक्ता)।
अन्य अभ्यास क्षेत्र
- उच्च न्यायालय रिट एवं संवैधानिक मामले
- कॉर्पोरेट एवं वाणिज्यिक विधि
- पारिवारिक एवं वैवाहिक विधि
- दीवानी वाद एवं व्यादेश (Injunctions)
- संपत्ति एवं रियल एस्टेट विधि
- विधिक प्रलेखन एवं कानूनी राय
- उपभोक्ता संरक्षण विधि
- सेवा एवं रोजगार विधि
- मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT)
- राजस्व एवं भूमि अभिलेख विधि
- चेक अनादरण (धारा 138 NI Act)
उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल
संवैधानिक रिट, अग्रिम/नियमित जमानत, FIR निरस्तीकरण एवं दीवानी अपीलों हेतु नैनीताल पीठ के समक्ष नियमित प्रतिनिधित्व।
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