दीवानी वाद एवं व्यादेश (Injunctions)
स्टे आर्डर, आदेश 39 CPC सिविल व्यादेश, विनिर्दिष्ट पालन, स्वत्व घोषणा एवं अपीलीय दीवानी पैरवी।
अभ्यास क्षेत्र विवरण
दीवानी मुकदमों में दस्तावेज़ी साक्ष्यों की गहन जांच, सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) का पूर्ण ज्ञान एवं सशक्त अदालती पैरवी आवश्यक होती है। हमारे चैम्बर्स आदेश 39 नियम 1 व 2 CPC के तहत स्टे आर्डर (Stay Order) एवं व्यादेश (Injunction), स्वत्व घोषणा वाद (Title Suits), बैनामा इकरारनामे का विनिर्दिष्ट पालन, पैतृक संपत्ति विभाजन वाद (Partition) एवं प्रथम/द्वितीय दीवानी अपीलों में विस्तृत सेवाएं प्रदान करते हैं।
प्रमुख विधिक सेवाएं एवं कार्यक्षेत्र
आदेश 39 स्टे आर्डर एवं व्यादेश (Stay Order)
संपत्ति पर अवैध कब्जे, तोड़फोड़ अथवा बिक्री को रोकने हेतु आदेश 39 CPC के तहत तत्काल अंतरिम व स्थायी रोक प्राप्त करना।
संविदा के विनिर्दिष्ट पालन का वाद (Specific Performance)
संपत्ति विक्रय इकरारनामे के उल्लंघन पर विक्रेता के विरुद्ध अनिवार्य बैनामा कराने हेतु दीवानी मुकदमा।
स्वत्व घोषणा एवं फर्जी बैनामा निरस्तीकरण
स्वामित्व हक (Title) की घोषणा, सुखाधिकार (Easement) वाद एवं धोखाधड़ी से किए गए बैनामे को निरस्त कराना।
पैतृक संपत्ति बंटवारा वाद (Partition Suits)
संयुक्त पारिवारिक संपत्ति में सह-खातेदारों के बीच हिस्सेदारी निर्धारण, प्रारंभिक डिक्री एवं कुरा निर्माण वाद।
प्रथम व द्वितीय दीवानी अपीलें एवं पुनरीक्षण
धारा 96 प्रथम अपील, धारा 100 द्वितीय अपील एवं धारा 115 CPC के तहत उत्तराखंड उच्च न्यायालय में पुनरीक्षण।
प्रासंगिक विधियां एवं वैधानिक प्रावधान
- सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC - आदेश 39, धारा 96, धारा 100, धारा 115)
- विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम, 1963 (व्यादेश एवं विनिर्दिष्ट पालन)
- भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 / भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023
- परिसीमा अधिनियम, 1963 एवं न्यायशुल्क अधिनियम, 1870
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
विधिक परामर्श एवं प्रकरण समीक्षा
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RCS & Associates चैम्बर्स
संस्थापक: अधिवक्ता रमेश चन्द सैनी (पूर्व वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी, उ.प्र.) | सदस्य: अधिवक्ता अमरदीप सैनी (नोटरी एवं अधिवक्ता)।
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- उच्च न्यायालय रिट एवं संवैधानिक मामले
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उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल
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