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शीर्ष संवैधानिक क्षेत्राधिकार

भारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India)

भारत का शीर्ष संवैधानिक न्यायालय (अपीलीय, रिट एवं स्थानांतरण क्षेत्राधिकार, नई दिल्ली)।

न्यायालय परिचय एवं क्षेत्राधिकार दायरा

नई दिल्ली स्थित भारत का सर्वोच्च न्यायालय भारतीय न्यायिक व्यवस्था का सर्वोच्च न्यायिक प्राधिकार है। RCS & Associates अधिकृत एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड (AoR) के समन्वय में उत्तराखंड उच्च न्यायालय (नैनीताल) के निर्णयों व आदेशों के विरुद्ध अनुच्छेद 136 के अंतर्गत विशेष अनुमति याचिकाएं (SLP), अनुच्छेद 32 के तहत मूल संवैधानिक रिट याचिकाएं, तथा धारा 25 CPC व धारा 447 BNSS / 406 Cr.P.C. के तहत अंतर्राज्यीय स्थानांतरण याचिकाएं प्रस्तुत करता है।

प्रमुख न्यायिक क्षेत्राधिकार एवं याचिकाएं

विशेष अनुमति अपीलीय क्षेत्राधिकार (अनुच्छेद 136 SLP)

उत्तराखंड उच्च न्यायालय के अंतिम निर्णयों एवं अंतरिम आदेशों के विरुद्ध विधि के सारभूत प्रश्नों एवं न्याय के हनन पर विशेष अनुमति याचिकाएं (SLP)।

मूल संवैधानिक रिट क्षेत्राधिकार (अनुच्छेद 32)

नागरिकों के मूल अधिकारों के प्रवर्तन हेतु राज्य एवं केंद्रीय प्राधिकरणों के विरुद्ध परमादेश, बंदी प्रत्यक्षीकरण एवं प्रतिषेध रिट याचिकाएं।

स्थानांतरण याचिकाएं (Civil & Criminal Transfer)

धारा 25 CPC एवं धारा 447 BNSS / 406 Cr.P.C. के अंतर्गत विभिन्न राज्यों के न्यायालयों के बीच वैवाहिक व दीवानी मुकदमों का स्थानांतरण।

सांविधिक अपीलें एवं पुनर्विचार (Review Petitions)

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम एवं वाणिज्यिक अपीलीय ढांचे के तहत सर्वोच्च न्यायालय में सीधी अपीलों एवं अनुच्छेद 137 पुनर्विचार याचिकाओं की पैरवी।

याचिका एवं प्रक्रियात्मक दिशानिर्देश

  • विचारण न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के प्रमाणित अभिलेखों (Paperbooks) की गहन विधिक जांच कर सारभूत विधि प्रश्नों का निर्धारण।
  • परिसीमा अवधि (उच्च न्यायालय के निर्णय/आदेश से 90 दिन) का कड़ाई से अनुपालन।
  • संक्षिप्त विवरण (Synopsis), विस्तृत तिथिक्रम (List of Dates) एवं संवैधानिक विधि प्रश्नों का प्रारूपण।
  • सर्वोच्च न्यायालय रजिस्ट्री एवं अधिकृत एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AoR) के साथ प्रभावी समन्वय।

न्यायालय क्षेत्राधिकार प्रश्नोत्तर

अनुच्छेद 136 के अंतर्गत SLP उत्तराखंड उच्च न्यायालय अथवा किसी अधिकरण के निर्णय, डिक्री या आदेश के विरुद्ध तब पोषणीय होती है जब मामले में विधि का कोई सारभूत प्रश्न अथवा न्याय का गंभीर हनन निहित हो।

धारा 25 CPC के तहत सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर आवेदक (विशेषकर पत्नी) की असुविधा, सुरक्षा अथवा आर्थिक कठिनाई के आधार पर वाद स्थानांतरण की मांग की जाती है।

रजिस्ट्री की आपत्तियां दूर होने एवं पंजीकरण के पश्चात सामान्यतः कुछ ही सप्ताहों में मामला सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष प्रारंभिक प्रवेश सुनवाई हेतु सूचीबद्ध हो जाता है।
विधिक प्रतिनिधित्व

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