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संपत्ति विधि

संपत्ति खरीदने से पूर्व 30-वर्षीय स्वत्व जांच एवं विधिक सावधानियां

अचल संपत्ति की खरीद में विधिक स्वत्व (Title) की गहन जांच भविष्य के अदालती मुकदमों एवं वित्तीय नुकसान से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।

प्रमुख विधिक निष्कर्ष

संपत्ति क्रय से पूर्व 30 वर्षों के पंजीकृत विलेखों की श्रृंखला, उप-निबंधक कार्यालय में भारमुक्त प्रमाण पत्र, राजस्व खतौनी में दाखिल-खारिज प्रविष्टि तथा मौके पर भौतिक कब्जे का सत्यापन अनिवार्य है।

1. 30-वर्षीय विलेख श्रृंखला (Chain of Title)

मूल स्वामी से लेकर वर्तमान विक्रेता तक हुए सभी पंजीकृत बैनामों, वसीयत अथवा दान पत्रों की निरंतरता की जांच करना।

2. भारमुक्त प्रमाण पत्र (Non-Encumbrance Certificate)

उप-निबंधक कार्यालय के रजिस्टरों का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करना कि संपत्ति पर कोई पूर्व बंधक (Mortgage), लीज या अदालती कुर्की दर्ज नहीं है।

3. राजस्व अभिलेख एवं दाखिल-खारिज

कृषि या ग्रामीण भूमि के मामले में खतौनी में विक्रेता का नाम दर्ज होना, श्रेणी-1क भूमि होना एवं सीलिंग सीमा का अनुपालन जांचना।

4. स्थानीय निकाय एवं लेआउट स्वीकृति

नगर पालिका या विकास प्राधिकरण से लेआउट की स्वीकृति एवं भू-उपयोग (Land Use) की विधिक पुष्टि।

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न

नहीं। सर्वोच्च न्यायालय के सूरज लैंप निर्णय के अनुसार, जीपीए से मालिकाना हक अंतरित नहीं होता; केवल पंजीकृत विक्रय विलेख ही स्वामित्व प्रदान करता है।

अनुबंध भविष्य में बैनामा करने का इकरार है, जबकि पंजीकृत विक्रय विलेख संपत्ति के पूर्ण स्वामित्व का वास्तविक विधिक अंतरण करता है।
Ramesh Chand Saini, Advocate
विधिक मार्गदर्शन नोट | RCS & Associates (रुड़की व हरिद्वार में अनुभवी वकील एवं अधिवक्ता)

संस्थापक: रमेश चन्द सैनी (पूर्व वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी, उ.प्र. | M.A., MBA, LL.M.) | सदस्य: अमरदीप सैनी (नोटरी एवं अधिवक्ता)

यह विधिक आलेख सामान्य सूचना एवं शैक्षणिक संदर्भ हेतु प्रकाशित किया गया है। यदि आपको उत्तराखंड उच्च न्यायालय (नैनीताल), सर्वोच्च न्यायालय अथवा जिला एवं सत्र न्यायालय हरिद्वार (रोशनाबाद) / रुड़की में रिट याचिका, स्टे आर्डर (Stay Order), अग्रिम जमानत (धारा 482 BNSS / 438 Cr.P.C.), नियमित जमानत, चेक बाउंस अथवा दीवानी विवाद में विधिक परामर्श आवश्यक है, तो कृपया संपर्क करें।

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